• 100% naturale

हस्तनिर्मित

शाम को दुहने से प्राप्त दूध को होल्डिंग बेसिनों में ढाला जाता है, जहां क्रीम का पृथक्करण रात भर में प्राकृतिक रूप से हो जाता है।तब इस आंशि स्किम्ड (मलाई उतरे हुए) दूध को तांबे के कड़ाहों में ढाला जाता है जहां इसे सुबह दुहे गए शुद्ध दूध से मिलाया जाता है।

तांबे के कड़ाहे में दूध को गुनगुना करने के बाद इसमें प्राकृतिक तोड़ मिलाया जाता है।यह तोड़ , पिछले दिन पनीर निर्माण प्रक्रिया के दौरान प्राप्त किए गए प्राकृतिक दुग्ध किण्वन का मिश्रण होता है।

राकृतिक रेनेट (जामन)

तब इसमें प्राकृतिक एंजाइम जामन मिलाया जाता है जिससे दूध जमने लगता है।

थक्केदार दूध को एक बड़े बैलून व्हिस्क (चंवर), जो ‘स्पिनो’ कहलाता है, से छोटे दानों में तोड़ा जाता है।

इसके बाद पकाने की प्रक्रिया की जाती है - यह पनीर निर्माण की अत्यन्त नाजुक प्रक्रिया है।दानों से पानी निकालने के लिए प्रधान पनीर निर्माता द्वारा ताप को दक्षतापूर्वक नियंत्रित किया जाता है। ताप बंद कर दिए जाने पर दाने, कड़ाहे के तले में बैठ जाते हैं और एक सघन पिंड का रूप बनाते हैं।

पनीर के पिंड को कड़ाहे के तले से निकाला जाता है और दो भागों में विभाजित कर दिया जाता है।

प्रत्येक भाग को “फसेरा” कहलाने वाले एक विशेष सांचे में रखा जाता है जहां यह दो या तीन दिनों तक रखा रहता है।